सोशल इंजीनियरिंग क्या है
सोशल इंजीनियरिंग वैसी ही है जैसा इसका नाम बताता है - सामाजिक कौशल का उपयोग करके मानव व्यवहार को प्रभावित करना। साइबर अपराधी इसका लाभ उठाते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि जिज्ञासा होने पर या अचानक असावधान पड़ जाने पर लोग अक्सर स्वयं ही गोपनीय जानकारी दे देते हैं या लिंक पर क्लिक कर देते हैं। वे हमारी भावनाओं तथा हमारे भरोसा और विश्वास करने की इच्छा का फ़ायदा उठाते हैं। उपर्युक्त उदाहरण में, धोखेबाज़ एक मित्र के साथ भावनात्मक जुड़ाव और उस संदेश पर तुरंत प्रतिक्रिया देने की बढ़ी हुई प्रवृत्ति का लाभ उठाने का प्रयास कर रहा था।साइबर अपराधियों द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीतियाँ
यह कोई नई बात नहीं है। अपराध के आरंभ से ही लोग अपना काम निकालने के लिए दूसरों के भरोसे का फ़ायदा उठाना सीखते आए हैं। लेकिन समय की प्रवृत्ति बदलने के साथ रणनीतियाँ भी बदलती रहती हैं। आज महामारी, दंगे और अंतरिक्ष प्रक्षेपण जैसे विषयों का उपयोग लोगों को ईमेल में दिए गए लिंक पर क्लिक करने या अटैचमेंट डाउनलोड करने के लिए राज़ी करने में किया जा रहा है। जैसे-जैसे हमारे समाज फिर से खुल रहे हैं, वे इस विषय का और अधिक फ़ायदा उठा रहे हैं। हाल के आँकड़े दर्शाते हैं कि अधिकांश साइबर हमले किसी न किसी प्रकार की सोशल इंजीनियरिंग पर निर्भर करते हैं। धोखेबाज़ फ़ोन, कार्यालय या ऑनलाइन माध्यम से संपर्क करते हैं। अपराधियों द्वारा उपयोग की जाने वाली सबसे आम रणनीतियाँ ये हैं:- Pretexting , जिसमें वे हमारा ध्यान आकर्षित करने के लिए किसी बहाने या झूठ का सहारा लेते हैं; Phishing , जिसमें हमें किसी विश्वसनीय संस्था की ओर से आया बताया गया ईमेल मिलता है, जो हमसे गोपनीय जानकारी देने के लिए कहता है; Vishing , जो phishing जैसा ही है, लेकिन फ़ोन पर होता है; Quid Pro Quo , जिसमें जानकारी के बदले हमें किसी लाभ का वादा किया जाता है, उदाहरण के लिए जब कोई IT तकनीशियन फ़ोन करके कहता है कि वह हमारा PC ठीक कर देगा, लेकिन इसके लिए उसे हमारा पासवर्ड चाहिए; ईमेल और खातों की हैकिंग , जो ठीक वही स्थिति है जो ऊपर घटित हुई - एक साइबर अपराधी किसी मित्र के Facebook खाते में लॉग इन करके सोशल मीडिया के सभी संपर्कों को निशाना बनाता है।
हम स्वयं को कैसे सुरक्षित रखें?
कुछ ऐसे उपाय हैं जिन्हें अपनाकर आप संभावित जोखिम को कम कर सकते हैं और धोखेबाज़ों द्वारा बिछाए गए जालों से बच सकते हैं। ऑनलाइन सुरक्षित रहने के लिए, हम आपको इन नियमों का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं:- धीमे चलें और हमेशा सतर्क रहें। धोखेबाज़ नहीं चाहते कि आप कार्य करने से पहले दोबारा सोचें। इसीलिए उनके द्वारा भेजे गए संदेशों या किए गए कॉल में तात्कालिकता का भाव होता है। रुकना, गहरी साँस लेना और संदिग्ध गतिविधि की सूचना हेल्पडेस्क को देना बिल्कुल उचित है।
- किसी भी अनचाहे संदेश पर संदेह करें । यदि ईमेल ऐसा दिखता है कि वह आपकी जानी-पहचानी किसी कंपनी की ओर से है, तो उसकी वेबसाइट का पता सर्च इंजन में टाइप करके और ज्ञात-सुरक्षित स्रोतों के माध्यम से उसे खोजकर वेबसाइट पर जाएँ।
- यदि आपके बैंक या किसी अन्य संगठन की ओर से कॉल आता है और कहा जाता है कि आपके खाते के संबंध में उनके पास महत्वपूर्ण जानकारी है, तो कॉल काट दें और उस संगठन को उस नंबर पर कॉल करें जो आपको ज्ञात है कि उन्हीं का है
- वित्तीय जानकारी या पासवर्ड के किसी भी अनुरोध का कभी उत्तर न दें।
- क्लिक करने से पहले हमेशा लिंक की जाँच करें , भले ही वे “आधिकारिक दिखते” हों।
- जब तक आपको पूरा विश्वास न हो कि कोई अटैचमेंट या लिंक वैध है, तब तक उसे कभी न खोलें, न डाउनलोड करें और न ही उस पर क्लिक करें
- ऐसे संदेशों पर कभी विश्वास न करें जो आपको कुछ जीतने पर बधाई देते हैं या कुछ मुफ़्त मिलने का वादा करते हैं । दुर्भाग्य से ऐसा कभी नहीं होता।
- अपने सभी उपकरणों पर एक अच्छा एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करें और उसे अपडेट रखें। अपने स्पैम फ़िल्टर को उच्च स्तर पर सेट करें।
- यदि आप सुनिश्चित नहीं हैं कि क्या करना है, तो अपनी IT और सुरक्षा टीमों से पूछें !
- प्रशिक्षण लें, प्रशिक्षण लें, प्रशिक्षण लें! सोशल इंजीनियरिंग के बारे में आप जितना अधिक जानते हैं, उतने ही अधिक सतर्क और सुरक्षित बनते हैं। धोखेबाज़ अपनी तकनीकों में बदलाव करते रहते हैं और लगातार अधिक चालाक होते जा रहे हैं, इसलिए अपने ज्ञान को नियमित रूप से ताज़ा करना और सबसे अद्यतन जानकारी रखना महत्वपूर्ण है।

